Author: Varsha Rani Tirkey
अंतरराषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ महिला दिवस की धूम-धाम को गà¥à¤œà¤¼à¤°à¥‡ बमà¥à¤¶à¥à¤•िल à¤à¤• पखवाड़ा बीता है और देश की बड़ी खबरों में à¤à¤• है, उतà¥à¤¤à¤° पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ के बà¥à¤²à¤‚दशहर में पंचायत के फरमान पर à¤à¤• पति ने पतà¥à¤¨à¥€ को सबके सामने पेड़ से बांधकर बेलà¥à¤Ÿ से पीटा, जब तक कि महिला बेहोश नहीं हो गई। महिला को पà¥à¤°à¥à¤· के हाथों पिटता देखने वाली à¤à¥€à¥œ का दिल इतने से à¤à¥€ नहीं à¤à¤°à¤¾ और लोगों ने महिला के घर घà¥à¤¸à¤•र उसे गंदी गालियां दीं और उसे तमाम अपमानजनक तमगों से नवाज़ा।
सज़ा तो अपराध की मिलती है, है ना! तो गर विवाहेतà¥à¤¤à¤° संबंध अपराध है, जिसकी सज़ा के तौर पर किसी महिला को पेड़ से बांधकर पीटा गया है, तो इसी अपराध के लिठपà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ के लिठकà¥à¤¯à¤¾ सज़ा है? कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि मैंने तो आज तक किसी पà¥à¤°à¥à¤· को विवाहेतà¥à¤¤à¤° संबंध के लिठसारà¥à¤µà¤œà¤¨à¤¿à¤• रूप से सज़ा पाते नहीं देखा है।
हममें से बहà¥à¤¤à¥‹à¤‚ ने ये खबर पà¥à¥€ होगी और वायरल वीडियो à¤à¥€ देखी होगी, लेकिन बाय चांस जिनकी नज़र इस खबर से चूक गई उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ बता दें कि खबरों के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• पंचायत ने महिला को उसके पति से पिटवाने का फरमान इसलिठदिया कि महिला अपने पति को छोड़ दूसरे के साथ चली गई थी, जिसे ढूंढकर ज़बरदसà¥à¤¤à¥€ पति के पास लाया गया और अपराध (सो कॉलà¥à¤¡) के लिठसज़ा दी गई।
मेरा सवाल उस पंचायत और उस जैसी पंचायतों से यह है कि पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ के विवाहेतà¥à¤¤à¤° संबंधों पर कितनी पतà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को यही आदेश दिठगठहैं कि सज़ा के तौर पर अपने पतियों को पेड़ से बांधकर सबके सामने लाठी और चपà¥à¤ªà¤²à¥‹à¤‚ से पिटाई करें? यहां साफ कर दूं कि अपनी मरà¥à¤œà¤¼à¥€ से ज़िंदगी का कोई फैसला लेने की सज़ा किसी को सारà¥à¤µà¤œà¤¨à¤¿à¤• रूप से पà¥à¤°à¤¤à¤¾à¥œà¤¿à¤¤ और जलील करके दी जाà¤, मैं इस पकà¥à¤· में नहीं हूं, चाहे वह महिला हो या पà¥à¤°à¥à¤·à¥¤ इन मामलों के लिठकानून में पà¥à¤°à¤¾à¤µà¤§à¤¾à¤¨ है और कानूनी पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ है। पà¥à¤°à¤®à¥à¤– बात ये है कि पंचायत का इस तरह किसी महिला या पà¥à¤°à¥à¤· को सजा देना गैरकानूनी है।
जब पंचायत के फरमान पर à¤à¤• महिला को सरेआम पीटा जा रहा था, उस दिन à¤à¥€ देश के अलग अलग कोने में करीब 936 महिलाà¤à¤‚ किसी न किसी पà¥à¤°à¤•ार की हिंसा से दो चार हà¥à¤ˆà¤‚ (NCRB)। पà¥à¤°à¥à¤·à¤µà¤¾à¤¦à¥€ समाज की पà¥à¤°à¥à¤·à¤µà¤¾à¤¦à¥€ पंचायतों के सामने तो à¤à¤• महिला का यह सवाल उठाना à¤à¥€ अपराध होगा कि कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ à¤à¤• डेॠसाल की बचà¥à¤šà¥€ या à¤à¤• यà¥à¤µà¤¤à¥€ या महिला के रेप का मामला समाज और पंचायत के लिठकानूनी मसला हो जाता है और वही पंचायत à¤à¤• पति को उसकी पतà¥à¤¨à¥€ को सबसे सामने पीट पीट कर सज़ा देने का फैसला सà¥à¤¨à¤¾à¤•र कानून हाथ में लेने से नहीं हिचकती?
मीडिया ने बाकी वायरल खबरों की तरह इस घटना को à¤à¥€ समाचार की तरह छाप दिया। लेकिन हमें समà¤à¤¨à¥‡ की ज़रूरत है कि यह महज़ à¤à¤• समाचार नहीं, à¤à¤• समसà¥à¤¯à¤¾ है उस समाज की जिसमें हम रहते हैं, जीते हैं। और जहां हमें जीना है, वहां समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं के समाधान की ज़रूरत है। महिलाओं के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ पà¥à¤°à¥à¤·à¤µà¤¾à¤¦à¥€ समाज की हिंसा का यह अकेला वाकया नहीं हैं।
हर मिनट कहीं कोई महिला पà¥à¤°à¥à¤·à¤µà¤¾à¤¦à¥€ सोच की षड़यंतà¥à¤° का शिकार हो रही होती है, जिनमें से कà¥à¤› की खबर हम तक पहà¥à¤‚चती है और कितनी नहीं
पहà¥à¤‚चती। कहीं कोई बहू दहेज के लालच की मार सह रही होती है, कहीं कोई बेटी à¤à¥‚ठी शान की à¤à¥‡à¤‚ट चॠजाती है, पà¥à¤°à¥à¤· दंठकी संतà¥à¤·à¥à¤Ÿà¤¿ के लिठकिसी लड़की का बलातà¥à¤•ार होता है, तो कहीं संपतà¥à¤¤à¤¿ के लिठकोई महिला डायन बताकर जलील की जाती है और मार दी जाती है।
21वीं सदी में जीने, मंगल गà¥à¤°à¤¹ तक यान à¤à¥‡à¤œà¤¨à¥‡ और टेकà¥à¤¨à¥‹à¤²à¥‰à¤œà¥€ के जà¥à¤žà¤¾à¤¤à¤¾ होने का दंठà¤à¤°à¤¨à¥‡ वाले देश में हर दिन, हर घड़ी कोई महिला पà¥à¤°à¥à¤·à¤µà¤¾à¤¦à¥€ सोच से उपजी हिंसा का शिकार होती है।
नेशनल कà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤® रिकॉरà¥à¤¡à¥à¤¸ बà¥à¤¯à¥‚रो (à¤à¤¨à¤¸à¥€à¤†à¤°à¤¬à¥€) दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ जारी आंकड़ो के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• साल 2016 में à¤à¤¾à¤°à¤–ंड में 27 महिलाओं को, तो ओडिशा में 24 महिलाओं को डायन बताकर मार दिया गया। बीते कà¥à¤› दशकों में à¤à¤¾à¤°à¤–ंड, ओडिशा, छतà¥à¤¤à¥€à¤¸à¤—à¥, तेलंगाना, राजसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ में कितनी महिलाओं को डायन बताकर पà¥à¤°à¤¤à¤¾à¥œà¤¿à¤¤ किया गया है।
उतà¥à¤¤à¤° पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ और मधà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ में महिलाओं, खास कर आदिवासी और दलित महिलाओं के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ हिंसा के सबसे ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ मामले दरà¥à¤œ किठगठहैं।
पशà¥à¤šà¤¿à¤® बंगाल, राजसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ और उतà¥à¤¤à¤° पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ में घरेलू हिंसा के सबसे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ मामले देखे गठहैं। वहीं महाराषà¥à¤Ÿà¥à¤°, उतà¥à¤¤à¤° पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ और मधà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ में महिलाओं और यà¥à¤µà¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के साथ छेड़छाड़ और बलातà¥à¤•ार के सबसे ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ मामले दरà¥à¤œ हà¥à¤ हैं।
पà¥à¤°à¥à¤·à¤µà¤¾à¤¦à¥€ समाज जहां अपनी लालच, à¤à¥‚ठी शान और अहंकार का ठीकरा हमेशा महिलाओं के सर फोड़ता है, वहीं महिलाओं ने à¤à¥€ अपने दम पर तो कà¤à¥€ कानून की मदद से बराबरी के हक और अपने अधिकार का संघरà¥à¤· जारी रखा है। सलाम उन महिलाओं को जो अपने खिलाफ हर साजिश को ठेंगा दिखाकर पà¥à¤°à¥à¤·à¤µà¤¾à¤¦à¥€ समाज से टकà¥à¤•र लेती हैं, खà¥à¤¦ के लिà¤, औरों के लिठआवाज़ उठाती हैं, पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•ार करती हैं और अपनी शरà¥à¤¤à¥‹à¤‚ पर ज़िदगी जीती हैं।
Disclaimer: The article has originally been published on Youth Ki Awaaz. Views expressed in the article are of the author’s.
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