Author: Varsha Rani Tirkey
जब मैंने उसे देखा तब वह कमरे में कोने पर रखी कà¥à¤°à¥à¤¸à¥€ पर वह चà¥à¤ªà¤šà¤¾à¤ª बैठा था। मैंने पूछा
“आप हिंदी समà¤à¤¤à¥‡ हैं?”
जवाब आया,
“बेटी को नहीं देख पाया, किसको कà¥à¤¯à¤¾ बोलूं।”
मैंने देखा वह अंगà¥à¤²à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ से आंखों का कोना पोंछ रहा था। शायद उसे रोना आ रहा था और वह खà¥à¤¦ को रोक रहा था। उसका नाम विनोद केरकेटà¥à¤Ÿà¤¾ है। विनोद, असम के टी टà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤¬ समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ से तालà¥à¤²à¥à¤• रखता है। असम के गोलाघाट ज़िले के नाहरबाड़ी गांव में उसका घर-परिवार है।
जब मैंने उससे नाम पूछा और कहा कि मैं बात करना चाहती हूं, तो उसने कहा कि उसके पास बात करने के लिठज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ समय नहीं है। असम, अपने घर जाने के लिठकà¥à¤› घंटे बाद उसे टà¥à¤°à¥‡à¤¨ पकड़नी है। बातें शà¥à¤°à¥‚ हà¥à¤ˆà¤‚ तो उसने बताया कि इससे पहले वह कà¤à¥€ दिलà¥à¤²à¥€ नहीं आया था। बस नाम सà¥à¤¨à¤¾ था।
काम की तलाश में असम से केरल आया था विनोद
कà¥à¤› महीनों पहले तक विनोद केरल में था। असम में अपने रिशà¥à¤¤à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¥‹à¤‚ के कहने पर बेहतर काम और पैसे के लिठवह केरल गया था। वहां कà¥à¤› महीने तक काम करने के बाद à¤à¤• दिन उसे अपनी पांच साल की बेटी के गंà¤à¥€à¤° रूप से बीमार होने की खबर मिली। खबर मिलते ही विनोद ने सबसे पहले अपनी सारी कमाई बेटी के इलाज के लिठघर à¤à¥‡à¤œ दी। फिर किसी तरह असम जाने के लिठटà¥à¤°à¥‡à¤¨ का टिकट खरीदा।
सारी कमाई घर à¤à¥‡à¤œà¤¨à¥‡ के बाद विनोद के पास à¤à¤• रà¥à¤ªà¤¯à¤¾ à¤à¥€ नहीं बचा था लेकिन उसे चिंता सिरà¥à¤« अपनी बेटी की थी। वह असम जाने के लिठटà¥à¤°à¥‡à¤¨ पर सवार हà¥à¤†à¥¤ वह बस जलà¥à¤¦ से जलà¥à¤¦ अपने घर, अपनी बेटी के पास पहà¥à¤‚चना चाहता था। यातà¥à¤°à¤¾ के दौरान जब बहà¥à¤¤ तेज़ पà¥à¤¯à¤¾à¤¸ लगी, तब à¤à¤• सà¥à¤Ÿà¥‡à¤¶à¤¨ पर विनोद नलके से पानी पीने के लिठटà¥à¤°à¥‡à¤¨ से उतरा लेकिन वापस टà¥à¤°à¥‡à¤¨ पर सवार नहीं हो सका।
वहां मानव तसà¥à¤•रों ने उसे धर दबोचा। विनोद ने बताया, “टà¥à¤°à¥‡à¤¨ से उतरकर मैं नलका ढूंढ रहा था, तà¤à¥€ à¤à¤• अंजान आदमी ने मेरी बांह पकड़ी और मà¥à¤à¤¸à¥‡ सवाल करता हà¥à¤† अपने साथ घसीटता हà¥à¤† ले चला। मà¥à¤à¥‡ पता नहीं कà¥à¤¯à¤¾ हà¥à¤†, मैं चल à¤à¥€ नहीं पा रहा था। मà¥à¤à¥‡ यह à¤à¥€ नहीं पता कि वह कौन सा सà¥à¤Ÿà¥‡à¤¶à¤¨ था।”
विनोद ने बताया, “मà¥à¤à¥‡ इतना याद है कि उस अंजान आदमी ने मà¥à¤à¥‡ à¤à¤• कमरे में ले जाकर बंद कर दिया, जहां पहले से कà¥à¤› 11 लोग बंद थे। दो दिन तक कमरे में बंद रखने के बाद à¤à¤• दूसरा आदमी आया और हमें कहा कि दिलà¥à¤²à¥€ ले जा रहे हैं, वहां काम मिलेगा। मैंने उस आदमी से कहा कि मेरी बेटी बीमार है, मà¥à¤à¥‡ अपने घर असम जाना है।”
मानव तसà¥à¤•री में फंस कर बंधà¥à¤† मज़दूर बना
विनोद के पास चूंकि à¤à¤• रà¥à¤ªà¤¯à¤¾ तक नहीं था इसलिठउससे कहा गया कि वह दिलà¥à¤²à¥€ में कà¥à¤› दिन काम करे और फिर कमाई के पैसे लेकर वह घर जा सकता है। उसने बताया, “वो आदमी मà¥à¤à¥‡ छोड़ नहीं रहा था। उसने कहा कि अगर मैं उसके साथ पहले दिलà¥à¤²à¥€ चलूं और कà¥à¤› दिन वहां काम करूं तो वह घर जाने में मेरी मदद करेगा। मेरे पास उसकी बात मानने के अलावा कोई दूसरा उपाय नहीं था। मैं बस किसी à¤à¥€ तरह अपने घर पहà¥à¤‚चना चाहता था। अपनी बेटी को देखना चाहता था।”
बेटी का वापस ज़िकà¥à¤° आया तो विनोद ने गरदन à¤à¥à¤•ा ली, दो पल शांत रहने के बाद उसने कहना शà¥à¤°à¥‚ किया, “बाद में पता चला कि मà¥à¤à¥‡ और दूसरे लोगों को दिलà¥à¤²à¥€ नहीं, सोनीपत लाया गया है। हमें वहां à¤à¤• बिलà¥à¤¡à¤¿à¤‚ग के काम में लगा दिया गया। सà¥à¤¬à¤¹ 8 बजे से लेकर रात के 8 बजे तक काम करवाया जाता था। टिन के छोटे-छोटे कमरे बने थे, वहीं हम रहते थे, रात में ज़मीन पर ही सोते थे। हमें नहाने धोने का साबà¥à¤¨ तक नहीं दिया जाता था। बीमार हों, तब à¤à¥€ काम करना पड़ता था, काम से मना करने पर पीटा जाता था।”
विनोद ने बताया कि जब उसने फिर से घर जाने की बात की तो उसे कहा गया कि पहले 2 महीने यहां काम करो, फिर तà¥à¤®à¥à¤¹à¥‡à¤‚ घर à¤à¥‡à¤œ देंगे।
घरवालों ने संसà¥à¤¥à¤¾ की मदद से विनोद को छà¥à¤¡à¤¼à¤¾à¤¯à¤¾
विनोद को समठमें आने लगा था, कि ये लोग उसे जाने नहीं देंगे, उसे अपनी बेटी की चिंता सता रही थी। वह बस किसी तरह वहां से निकलना चाहता था। उसने अपनी बेटी का हाल खबर जानने के लिठवहां काम करवाने वाले आदमी का मोबाइल मांगा और मौका देखकर घरवालों को फोन कर अपने बारे में जानकारी दी।
उसके घरवालों ने तà¥à¤°à¤‚त रिशà¥à¤¤à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¥‹à¤‚ की मदद से दिलà¥à¤²à¥€ में कैथोलिक बिशपà¥à¤¸ कांफà¥à¤°à¥‡à¤‚स आफ इंडिया (सीबीसीआई) से संपरà¥à¤• किया और उनके माधà¥à¤¯à¤® से सामाजिक कारà¥à¤¯à¤•रà¥à¤¤à¤¾ निरà¥à¤®à¤² गोराना से बात कर उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पूरा मामला बताया और उनकी मदद मांगी।
निरà¥à¤®à¤² गोराना अनौपचारिक कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° के कामगारों के संरकà¥à¤·à¤£ और अधिकारों के लिठकाम करते हैं और गैर सरकारी संसà¥à¤¥à¤¾ à¤à¤•à¥à¤¶à¤¨à¤à¤¡ इंडिया के साथ जà¥à¥œà¥‡ हैं।
निरà¥à¤®à¤² ने बताया, “सीबीसीआई से मà¥à¤à¥‡ कॉल आई। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने मà¥à¤à¥‡ पूरा मामला बताया। मैंने सबसे पहले दिलà¥à¤²à¥€ में सà¥à¤ªà¥‡à¤¶à¤² पोलिस यूनिट फॉर ईसà¥à¤Ÿ रीजन (à¤à¤¸à¤ªà¥€à¤¯à¥‚à¤à¤¨à¤†à¤°) को संपरà¥à¤• किया फिर सोनीपत, हरियाणा में डिपà¥à¤Ÿà¥€ पà¥à¤²à¤¿à¤¸ कमिशà¥à¤¨à¤° को संपरà¥à¤• कर सारी जानकारी दी। सीबीसीआई के सदसà¥à¤¯ और मैं सोनीपत गठऔर राइ पà¥à¤²à¤¿à¤¸ थाने में शिकायत दरà¥à¤œ कराई, जिसके बाद सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥€à¤¯ पà¥à¤²à¤¿à¤¸ की मदद से विनोद को छà¥à¥œà¤µà¤¾à¤¯à¤¾ गया।”
à¤à¤• बार को यह मान लें कि विनोद के साथ हà¥à¤† वाकया à¤à¤• बà¥à¤°à¤¾ हादसा था, जो दà¥à¤°à¥à¤à¤¾à¤—à¥à¤¯ से घटा, जब वह टà¥à¤°à¥‡à¤¨ से उतरा और तसà¥à¤•रों के चंगà¥à¤² में फंस गया लेकिन देश में मानव तसà¥à¤•री के मामले आठदिन सामने आते हैं और ये बेहद चिंता की बात है।
कई सारे मामले तो पà¥à¤²à¤¿à¤¸ में दरà¥à¤œà¤¼ तक नहीं होते और मानव तसà¥à¤•री के पीड़ित ज़बरन यौन वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤¾à¤° और बंधà¥à¤† मजदूरी जैसी गà¥à¤²à¤¾à¤®à¥€ की अंधेरी गरà¥à¤¤ में ज़िंदगी को बिताने को मजबूर होते हैं।
मजबूरी का फायदा उठाकर आज à¤à¥€ बंधà¥à¤† मज़दूरी जारी है
बीते अगसà¥à¤¤ महीने में आखिरी सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ में 19 लोगों को महाराषà¥à¤Ÿà¥à¤° के पà¥à¤£à¥‡ की à¤à¤• गà¥à¥œ बनाने वाली फैकà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€ की बंधà¥à¤† मजदूरी से छà¥à¥œà¤¾à¤¯à¤¾ गया। इन लोगों को पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤®à¤¾à¤¹ 10000 रà¥à¤ªà¤¯à¥‡ के बदले गà¥à¥œ बनाने वाली फैकà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€ काम दिलाने के वादे के साथ उतà¥à¤¤à¤° पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ के à¤à¤• गांव से पà¥à¤£à¥‡ ले जाया गया था।
इन 19 लोगों में महिलाà¤à¤‚ और बचà¥à¤šà¥‡ à¤à¥€ शामिल थे लेकिन पà¥à¤£à¥‡ ले जाठजाने के बाद इन सब लोगों को फैकà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€ में बंधà¥à¤† मजदूरी में लगा दिया गया, जहां ना रहने की उचित वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ थी और न ही काम के पैसे मिले, बस मिली तो पà¥à¤°à¤¤à¤¾à¥œà¤¨à¤¾à¥¤
बंधà¥à¤† मज़दूरी का à¤à¤• और मामला हाल ही में सामने आया था, जहां लोगों की ज़रूरत और मजबूरी का फायदा उठाकर उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ बंधà¥à¤† मज़दूरी में धकेला गया था।
Posted by Nirmal Gorana on Tuesday, 25 June 2019
उतà¥à¤¤à¤° पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ के रहने वाले 61 लोगों को अगà¥à¤°à¤¿à¤® à¤à¥à¤—तान के बदले à¤à¤• ईंट à¤à¤Ÿà¥à¤Ÿà¥‡ में काम के लिठगà¥à¤œà¤°à¤¾à¤¤ ले जाया गया। महीनों तक उन लागों को खरà¥à¤šà¥‡ के लिठथोड़े बहà¥à¤¤ पैसे देकर बेहद खराब सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में दिन रात काम कराया गया और à¤à¤• रात बिना कà¥à¤› बताà¤, उनके काम का हिसाब किठबिना डरा धमका कर उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¤—ा दिया गया।
अनौपचारिक कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° के पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¸à¥€ कामगारों की सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ के बारे में बात करते हà¥à¤ निरà¥à¤®à¤² ने बताया, “पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¸à¥€ मजदूरों के संरकà¥à¤·à¤£ के लिठइंटर सà¥à¤Ÿà¥‡à¤Ÿ माइगà¥à¤°à¥‡à¤‚ट वरà¥à¤•मेन à¤à¤•à¥à¤Ÿ, 1979 है, जिसके तहत काम के लिठबाहर जाने वाले मजदूरों के सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¸ सà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¤ करने की जिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¥€ राजà¥à¤¯à¥‹à¤‚ पर है। हमने इस à¤à¤•à¥à¤Ÿ के सही कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤¨à¥à¤µà¤¯à¤¨ की मांग के लिठगà¥à¤µà¤¾à¤¹à¤¾à¤Ÿà¥€ और अगरतला उचà¥à¤š नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ सहित दूसरे राजà¥à¤¯à¥‹à¤‚ के उचà¥à¤š नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¾à¤²à¤¯à¥‹à¤‚ में याचिका दायर दी है। à¤à¤•à¥à¤Ÿ के कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤¨à¥à¤¯à¤µà¤¯à¤¨ में लापरवाही की वजह से हर साल अनौपचारिक कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° के लगà¤à¤— हजार कामगार मानव तसà¥à¤•री के शिकार होते हैं, जिनमें से 99 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ बंधà¥à¤† मजदूरी में फंस जाते हैं।”
इंटर सà¥à¤Ÿà¥‡à¤Ÿ माइगà¥à¤°à¥‡à¤‚ट वरà¥à¤•मेन à¤à¤•à¥à¤Ÿ, 1979 के तहत सà¤à¥€ पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¸à¥€ मज़दूरों का संबंधित विà¤à¤¾à¤— में पंजीकरण अनिवारà¥à¤¯ है, जिससे कि विà¤à¤¾à¤— पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¸à¥€ मजदूरों की सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ सà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¤ कर सके। विनोद जब काम के लिठअसम से केरल गया था, तब यदि उसका नाम विà¤à¤¾à¤— में पंजीकृत होता, तो उसे बंधà¥à¤† मज़दूरी से बचाया जा सकता था।
विनोद को सामाजिक संसà¥à¤¥à¤¾à¤“ं और पà¥à¤²à¤¿à¤¸ के पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ से बंधà¥à¤† मजदूरी से छà¥à¥œà¤¾à¤•र दिलà¥à¤²à¥€ लाया गया और उसे उसकी बेटी के गà¥à¤œà¤¼à¤° जाने की खबर दी गई।
आखिरकार, विनोद को सकà¥à¤¶à¤² उसके घर असम के नाहरबारी गांव में उसके परिवार के पास पहà¥à¤‚चाया जा सका लेकिन à¤à¤• पिता का दरà¥à¤¦, जिसने इतना कà¥à¤› सहा पर अपनी बेटी को आखिरी बार नहीं देख पाया, उसकी à¤à¤°à¤ªà¤¾à¤ˆ नहीं हो सकती।
सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ हर कामगार का अधिकार है, जिसे सà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤šà¤¿à¤¤ करने के लिठराजà¥à¤¯ सरकारों और सामाजिक संसà¥à¤¥à¤¾à¤“ं को मिलकर काम करने और इस दिशा में ठोस कदम उठाठजाने की जरूरत है।
Disclaimer: The article has been initially published on Youth Ki Awaaz. Views expressed in the article are of the author’s.
नोट: यह आरà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ल मूल रूप से यूथ की आवाज़ हिंदी में पà¥à¤°à¤•ाशित किया गया है. आरà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ल में वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤ विचार लेखिका के हैं.
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