अनियमित कामगारों के राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ सरà¥à¤µà¥‡à¤•à¥à¤·à¤£ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, “लॉकडाउन से अब तक 75% से ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ कामगार अपना रोज़गार गà¤à¤µà¤¾ चà¥à¤•े हैं.â€
देश à¤à¤° में, 11,500 अनियमित कामगारों के साथ किठगठà¤à¤• सरà¥à¤µà¥‡ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, “लॉकडाउन के दौरान खादà¥à¤¯ उपà¤à¥‹à¤— पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हà¥à¤ˆ है.Â
सरà¥à¤µà¥‡à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ 11,537 में से तीन-चौथाई से à¤à¥€ अधिक लोगों ने बताया कि लॉकडाउन घोषित होने के बाद उनका रोज़गार चला गया. इनमे से क़रीब आधे लोगों ने कहा कि उनकी इस दौरान कोई आय नहीं हà¥à¤ˆ, 17% लोगों का कहना था कि उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ आंशिक वेतन ही पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ हà¥à¤†. तक़रीबन 53% लोगों का कहना था कि लॉकडाउन के दौरान उनके क़रà¥à¤œà¤¼ में इज़ाफ़ा हà¥à¤†. क़रीब आधे लोगों, जो पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¸à¥€ मज़दूर थे, ने कहा कि वे à¤à¤• महीने से à¤à¥€ ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ फà¤à¤¸à¥‡ रहे. आवशà¥à¤¯à¤• सेवाओं तक लोगों की पहà¥à¤à¤š à¤à¥€ बà¥à¤°à¥€ तरह से पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ हà¥à¤ˆ. कà¥à¤² 11,537 लोगों के केवल छठे हिसà¥à¤¸à¥‡ ने ही कहा कि उनका खादà¥à¤¯ उपà¤à¥‹à¤— परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ à¤à¤° रहा, लॉकडाउन से पहले से काफ़ी कम था, जबकि उनमें से 83% को लगता था कि उनका खादà¥à¤¯ उपà¤à¥‹à¤— परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ था. खादà¥à¤¯ उपà¤à¥‹à¤— की आवृति में à¤à¥€ à¤à¤¾à¤°à¥€ कमी आई है. जब उनसे पूछा गया कि वे दिन में कितनी बार खाना खाते थे तो 93% ने कहा लॉकडाउन से पहले वे दिन में दो बार à¤à¥‹à¤œà¤¨ करते थे. केवल 63% ने ही लॉकडाउन के बाद, दो बार à¤à¥‹à¤œà¤¨ करने की बात बताई. क़रीब तीन-चौथाई ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ सेवाओं तक उनकी पहà¥à¤à¤š नहीं थी.
ऊपर दिठगठआà¤à¤•ड़े à¤à¤•à¥à¤¶à¤¨à¤à¤¡ à¤à¤¸à¥‹à¤¸à¤¿à¤à¤¶à¤¨ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ लॉकडाउन के तीसरे चरण, अनियमित कामगारों के राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤µà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥€ अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ में, देश à¤à¤° के 20 राजà¥à¤¯à¥‹à¤‚ और केंदà¥à¤°-शासित पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶à¥‹à¤‚ से à¤à¤•तà¥à¤°à¤¿à¤¤ किठगठहैं. à¤à¤•à¥à¤¶à¤¨à¤à¤¡ à¤à¤¸à¥‹à¤¸à¤¿à¤à¤¶à¤¨ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ कई चरणों में किये जा रहे वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤• अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ की यह पहली रिपोरà¥à¤Ÿ है. सरà¥à¤µà¥‡à¤•à¥à¤·à¤£ में à¤à¤¾à¤— लेने वाले पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤à¤¾à¤—ियों की पहले से मौजूद दà¥à¤¶à¤µà¤¾à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को, जिनमे 60% पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¸à¥€ मज़दूर हैं, यहाठरेखांकित किया गया है. यह रिपोरà¥à¤Ÿ उनकी जीविका, वेतन, और राहत à¤à¤µà¤‚ अधिकारों पर पड़ने वाले पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥‹à¤‚ पर à¤à¥€ रौशनी डालती है. इसके अलावा, इस रिपोरà¥à¤Ÿ में आवास, देनदारी, खादà¥à¤¯ सामगà¥à¤°à¥€, पेयजल तथा सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ सेवाओं तक उनकी पहà¥à¤à¤š, जिसका लंबे समय में उनके जीवन पर वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤• असर पड़ सकता हैं, पर à¤à¥€ बात रखी गई है.
महामारी के कारण अनियमित कामगारों के जीवन और जीविका में आने वाले बदलावों को à¤à¥€ यह रिपोरà¥à¤Ÿ दरà¥à¤œ करती है. यह रिपोरà¥à¤Ÿ संकट की इस घड़ी में लड़ने के लिठउनके दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ अपनाठजाने वाले तरीक़ों के अनà¥à¤à¤µà¥‹à¤‚ पर à¤à¥€ अंतरà¥à¤¦à¥ƒà¤·à¥à¤Ÿà¤¿ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करती है. आगामी महीनों में, कई चरणों में इनà¥à¤¹à¥€à¤‚ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤à¤¾à¤—ियों के साथ किठजाने वाले सरà¥à¤µà¥‡à¤•à¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ में उनकी आय, रोज़गार, पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¸à¤¨ के सà¥à¤µà¤°à¥‚प, संपतà¥à¤¤à¤¿ सà¥à¤µà¤¾à¤®à¤¿à¤¤à¥à¤µ, खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ तक पहà¥à¤à¤š, पेयजल, आवशà¥à¤¯à¤• सेवाओं, क़रà¥à¤œà¤¼à¤¦à¤¾à¤°à¥€, बचत, अधिकार और सामाजिक सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ पर नज़र रखी जायेगी.
इस अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ का मक़सद जारी संकट में कामगारों के जीवन पर पड़ने वाले पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥‹à¤‚ और उनके दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ इससे निबटने के लिठअपनाठगठकारगर तरीक़ों पर समà¤à¤¦à¤¾à¤°à¥€ को गहरा बनाना है.
यह रिपोरà¥à¤Ÿ अनियमित कामगारों तक राहत सामगà¥à¤°à¥€ पहà¥à¤à¤šà¤¾à¤¨à¥‡, उनके जीवन और जीविका के शà¥à¤°à¥‹à¤¤à¥‹à¤‚ के पà¥à¤¨à¤°à¥à¤¨à¤¿à¤°à¥à¤®à¤¾à¤£ और उनके अधिकारों की रकà¥à¤·à¤¾ की रणनीति तैयार करने में मददगार साबित होगी. à¤à¤•à¥à¤¶à¤¨à¤à¤¡ à¤à¤¸à¥‹à¤¸à¤¿à¤à¤¶à¤¨ इस अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ से, अनियमित कामगारों के साथ अपने ज़मीनी हसà¥à¤¤à¤•à¥à¤·à¥‡à¤ªà¥‹à¤‚ के लिठà¤à¥€ सीख लेगी और साथ-साथ नीति-निरà¥à¤®à¤¾à¤¤à¤¾à¤“ं को दिशा पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करने का à¤à¥€ काम करेगी. आज के संदरà¥à¤à¥‹à¤‚ और à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯ में यह रिपोरà¥à¤Ÿ शोधकरà¥à¤¤à¤¾à¤“ं, नीति-निरà¥à¤®à¤¾à¤¤à¤¾à¤“ं, मज़दूर संगठनों तथा सिविल सॉसाईटी के सदसà¥à¤¯à¥‹à¤‚ के लिठà¤à¥€ उपयोगी साबित होगी.
इस मौक़े पर बोलते हà¥à¤ à¤à¤•à¥à¤¶à¤¨à¤à¤¡ à¤à¤¸à¥‹à¤¸à¤¿à¤à¤¶à¤¨ के कारà¥à¤¯à¤•ारी निदेशक, संदीप चाचरा ने कहा, “महामारी ने हमारे समाज की हदों, अरà¥à¤¥à¤µà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ तथा अनà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤“ं को à¤à¥€ उजागर किया है. कोविड-19 के पà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤° ने हमें अपनी कलà¥à¤ªà¤¨à¤¾ की हद दिखा दी है. हमने देखा कि इस संकट दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ दिठगठà¤à¤Ÿà¤•ों से कैसे सरकारें पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤•ारी तरीक़े से निबटने में नाकाम रहीं. पिछले कà¥à¤› दशकों में हासिल किठगठसामाजिक-आरà¥à¤¥à¤¿à¤• फ़ायदों, जैसे ग़रीबी और खादà¥à¤¯ असà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ में कमी, को à¤à¤¾à¤°à¥€ आघात लगा है. इसके साथ-साथ, जातिगत, धारà¥à¤®à¤¿à¤• और लैंगिक दरारें à¤à¥€ पहले से ज़à¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ चौड़ी और गहरी हà¥à¤ˆ हैं. यह नीति-निरà¥à¤®à¤¾à¤¤à¤¾à¤“ं और सिविल सॉसाईटी के लिठà¤à¥€ आतà¥à¤®à¤®à¤‚थन का समय है. वे विचार करें कि कैसे समà¥à¤¦à¤¾à¤¯à¥‹à¤‚ को à¤à¤¸à¥‡ किसी संकट से निबटने के लिठऔर अधिक सकà¥à¤·à¤® à¤à¤µà¤‚ मज़बूत बनाया जा सकता है. पà¥à¤¨à¤°à¥à¤¨à¤¿à¤°à¥à¤®à¤¾à¤£ की इस पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में अपने चà¥à¤¨à¤¾à¤µà¥‹à¤‚ और तरीक़ों को लेकर हमें इससे मिली सीख को आतà¥à¤®à¤¸à¤¾à¤¤ करने की ज़रूरत है. पà¥à¤°à¤—ति के लिठà¤à¤• à¤à¤¸à¤¾ वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾à¤—त परिवरà¥à¤¤à¤¨ तà¤à¥€ संà¤à¤µ है, जब हम संरचनातà¥à¤®à¤• ‘फ़ॉलà¥à¤Ÿ लाइन’ की शिनाखà¥à¤¤ करें और उसे समà¤à¥‡à¤‚.â€
पूरी रिपोरà¥à¤Ÿ पढ़ने के लिठयहाठकà¥à¤²à¤¿à¤• करें:
https://www.actionaidindia.org/wp-content/uploads/2020/08/Workers-in-the-time-of-Covid-19_ebook1.pdf
अधिक जानकारी के लिठसंपरà¥à¤• करें:
जोसेफ़ मथाई: 9810188022
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