दिलà¥à¤²à¥€, 10 फरवरी | तमिलनाडू के तिरà¥à¤ªà¥à¤° की रहने वाली यशोधा à¤à¤• खेतिहर मजदूर है। जब वह छोटी थी, तब à¤à¤• निजी नारियल बागान में à¤à¤• बंधà¥à¤† मजदूर थी। शादी के कà¥à¤› समय बाद ही वह विधवा हो गई और काम करने के बदले बेहद कम पैसे मिलने के कारण उसे अपने जीवनयापन के लिठकड़ा संघरà¥à¤· करना पड़ा। यही नहीं, पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥‡ करà¥à¤œ चà¥à¤•ाने के लिठवह सà¥à¤µà¤¯à¤‚ सहायता समूह, माइकà¥à¤°à¥‹ फाइनांस इंसà¥à¤Ÿà¥€à¤Ÿà¥à¤¯à¥‚ट और जमींदारों से पैसे लेती रही और इस समय उस पर लगà¤à¤— à¤à¤• लाख रà¥à¤ªà¤ का करà¥à¤œ है। लाॅकडाउन के दौरान करीब डेॠमहीने से à¤à¥€ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ समय तक उसके पास न आजीविका थी और न ही आय का कोई और साधन। लाॅकडाउन खतà¥à¤® होने के बाद à¤à¥€ उसकी बà¥à¤¤à¥€ उमà¥à¤° के कारण उसे आसानी से काम नहीं मिलता। वहीं, महिला होना और पिछड़े समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ से होना उसकी दिकà¥à¤•तों और मà¥à¤¶à¥à¤•िलों को और बà¥à¤¾ देता है। दो वकà¥à¤¤ के खाने के लिठउसे कई दिनों तक पीडीà¤à¤¸ और पड़ोसियों की दया पर निरà¥à¤à¤° रहना पड़ा, जब आय का à¤à¤• मातà¥à¤° जरिया अनियमित मनरेगा रोजगार और दो महीनों के लिठराजà¥à¤¯ सरकार की तरफ से मिली वितà¥à¤¤à¥€à¤¯ सहायता थी।
यशोदा (बदला हà¥à¤† नाम) इन मà¥à¤¶à¥à¤•िलों का सामना करने वाली अकेली महिला नहीं है। à¤à¤•à¥à¤¶à¤¨à¤à¤¡ à¤à¤¸à¥‹à¤¶à¤¿à¤à¤¶à¤¨ इंडिया दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ अनौपचारिक कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° के कामगारों की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ पर किठगठराषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥€ अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ के दूसरे चरण की रिरà¥à¤ªà¥‹à¤Ÿ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° सरà¥à¤µà¥‡ के कà¥à¤² पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤à¤¾à¤—ियों में से करीब 48 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ का कहना था कि लाॅकडाउन खतà¥à¤® होने के बााद à¤à¥€ वे बेरोजगार हैं। हांलांकि अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ के पहले चरण, जो कि लाॅकडाउन के दौरान किया गया था, की तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में इस बार सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ थोड़ी बेहतर हà¥à¤ˆ है। पहले चरण में सरà¥à¤µà¥‡ में à¤à¤¾à¤— लेने वाले कà¥à¤› पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤à¤¾à¤—ियों में से करीब 78 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ ने कहा था कि उनका रोजगार छिन चà¥à¤•ा है और वे बेरोजगार हैं। हालांकि 42 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ के करीब कामगार, जिनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने लाॅकडाउन खतà¥à¤® होने के बाद वापस काम पर जाना शà¥à¤°à¥‚ किया है, उनका कहना है कि काम कà¤à¥€ मिलता है कà¤à¥€ नहीं मिलता और काम समय के लिठकाम मिलता है। à¤à¤¸à¤¾ अनलॉक पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में काम की गहनता के कारण à¤à¥€ हो सकता है, जो कि पहले से बà¥à¥€ है, लेकिन लाॅकडाउन से पहले की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ जिसे हम सामानà¥à¤¯ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ मान सकते हैं, से काॅफी कम है।
अनौपचारिक कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° के शà¥à¤°à¤®à¤¿à¤•ों के देशवà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥€ अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ के लिठदूसरे चरण के सरà¥à¤µà¥‡à¤•à¥à¤·à¤£ में देश à¤à¤° के 23 राजà¥à¤¯à¥‹à¤‚ के 400 से अधिक जिलों में 16,900 से अधिक अनौपचारिक कामगारों से बातचीत की गई। यह सरà¥à¤µà¥‡à¤•à¥à¤·à¤£ 23 अगसà¥à¤¤ 2020 से 8 सितंबर 2020 तक अनलॉक पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ 3.0 के दौरान किया गया, जो सरकार की चरणवार अनलाॅक पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के माधà¥à¤¯à¤® से लाॅकडाउन खतà¥à¤® करने की योजना का तीसरा चरण था।
साकà¥à¤·à¤¾à¤¤à¥à¤•ार में शामिल कामगारों से विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ मà¥à¤¦à¥à¤¦à¥‹à¤‚ पर बातचीत करने के दौरान उनकी आजीविका, वेतन, बचत, खपत, वà¥à¤¯à¤¯ और कलà¥à¤¯à¤¾à¤£à¤•ारी योजनाओं तक उनकी पहà¥à¤‚च के बारे में के बारे में पूछा गया। कामगारों का लगà¤à¤— à¤à¤• तिहाई शहरी कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ से जबकि 72 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ गà¥à¤°à¤¾à¤®à¥€à¤£ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ से था। वहीं, 63 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ पà¥à¤°à¥à¤· कामगार, 37 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ महिला कामगार और 17 टà¥à¤°à¤¾à¤‚सजेंडर कामगारों ने सरà¥à¤µà¥‡ में हिसà¥à¤¸à¤¾ लिया। अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ का उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ इस बात इस बात को गहराई से समà¤à¤¨à¤¾ है कि मौजूदा देशवà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥€ संकट अनौपचारिक कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में शà¥à¤°à¤®à¤¿à¤•ों के जीवन पर किस तरह से पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ डाल रहा है।
चूंकि रोजगार की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ अब à¤à¥€ पूरà¥à¤µ-लॉकडाउन के सà¥à¤¤à¤° से कहीं पीछे हैै, इस कारण कामगारों को मिलने वाला मासिक वेतन बहà¥à¤¤ कम है। लगà¤à¤— 24 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ कामगारों ने अनलॉक की पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में न के बराबर वेतन पाने की बात कही और 50 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ के लगà¤à¤— कामगारों ने मासिक वेतन 5,000 रà¥à¤ªà¤ से à¤à¥€ कम होने की बात कही। इसके अतिरिकà¥à¤¤, 64 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ से अधिक कामगारों ने कहा कि लाॅकडाउन के दौरान उनका बकाया वेतन अब तक उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ नहीं मिला है।
रोजगार और वेतन के निमà¥à¤¨ सà¥à¤¤à¤° को देखते हà¥à¤, उपà¤à¥‹à¤— और बचत का तनाव अनौपचारिक कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° के शà¥à¤°à¤®à¤¿à¤•ों के जीवन पर सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ रूप से दिखाई देता है। कà¥à¤² मिलाकर, 68 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ कामगारों ने कहा कि उनके परिवार के लिठà¤à¥‹à¤œà¤¨ परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ नहीं था। 88 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ के करीब शà¥à¤°à¤®à¤¿à¤•ों ने कहा कि उनकी बचत उनके लिठपरà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ नहीं थी। इसमें शहरी से 93 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ कामगार और गà¥à¤°à¤¾à¤®à¥€à¤£ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ के 86 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ कामगार शामिल हैं। इसके अलावा, लगà¤à¤— 39 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ शà¥à¤°à¤®à¤¿à¤•ों ने बताया कि उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अनलॉक की पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के दौरान परिवार का खरà¥à¤š चलाने के लिठउधार लेना पड़ा है। इसमें शहरी कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ के 47 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ शà¥à¤°à¤®à¤¿à¤• और गà¥à¤°à¤¾à¤®à¥€à¤£ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ के 36 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ शà¥à¤°à¤®à¤¿à¤• शामिल हैं। लॉकडाउन से पहले काम के लिठदूसरी जगहों या गांव से शहरों को पलायन करने वाले शà¥à¤°à¤®à¤¿à¤•ों का कहना है कि वे अब काम के लिठबाहर नहीं जाना चाहते हैं। लगà¤à¤— 57 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ à¤à¤¸à¥‡ शà¥à¤°à¤®à¤¿à¤•ों ने कहा कि वे अपने गृह जिलों में रहकर ही काम तलाश करेंगे। इसके पीछे पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¸ शहर या जिले में कोविड -19 के संकà¥à¤°à¤®à¤£ का खतरा, रोजगार के अवसरों की कमी, और शहरों में सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ सामानà¥à¤¯ होने में लगने वाले समय की अनिशà¥à¤šà¤¤à¤¤à¤¾ पà¥à¤°à¤®à¥à¤– वजहें हैं।
सरà¥à¤µà¥‡à¤•à¥à¤·à¤£ के ये शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ परिणाम अनौपचारिक कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° के शà¥à¤°à¤®à¤¿à¤•ों के जीवन को वापस पटरी पर लाने के पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸, उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ करà¥à¤œ में डूबने से बचाने के पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ और उनके लिठआजीविका के पà¥à¤¨à¤°à¥à¤¨à¤¿à¤°à¥à¤®à¤¾à¤£ की ततà¥à¤•ाल आवशà¥à¤¯à¤•ता को उजागर करते हैं। सरà¥à¤µà¥‡ के परिणामों और निषà¥à¤•रà¥à¤·à¥‹à¤‚ को à¤à¤• विसà¥à¤¤à¥ƒà¤¤ रिपोरà¥à¤Ÿ के साथ-साथ आने वाले कà¥à¤› सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ में राजà¥à¤¯ सà¥à¤¤à¤° के आंकड़ों के साथ नीतियों और जमीनी हसà¥à¤¤à¤•à¥à¤·à¥‡à¤ªà¥‹à¤‚ के लिठआधार को मजबूती देने के लिठसामने लाया जाà¤à¤—ा।
à¤à¤•à¥à¤¶à¤¨à¤à¤¡ à¤à¤¸à¥‹à¤¸à¤¿à¤à¤¶à¤¨ के कारà¥à¤¯à¤•ारी निदेशक संदीप चाचरा ने अनौपचारिक कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° के शà¥à¤°à¤®à¤¿à¤•ों पर किठगठदेशवà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥€ अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ के दूसरे चरण की रिपोरà¥à¤Ÿ जारी करते हà¥à¤ कहा, “à¤à¤•à¥à¤¶à¤¨à¤à¤¡ à¤à¤¸à¥‹à¤¸à¤¿à¤à¤¶à¤¨ ने देश à¤à¤° में अनौपचारिक कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° के शà¥à¤°à¤®à¤¿à¤•ों की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ को गहराई से समà¤à¤¨à¥‡ के लिठयह देशवà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥€ सरà¥à¤µà¥‡à¤•à¥à¤·à¤£ किया है, ताकि कोविड -19 की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ और संकट का सामना करने में उनकी मà¥à¤¶à¥à¤•िलों और जरूरतों को समà¤à¤¤à¥‡ हà¥à¤ उनकी मदद के लिठसही कदम उठाठजा सकें। हम आशा करते हैं कि इस रिपोरà¥à¤Ÿ में शामिल सà¥à¤à¤¾à¤µ, जिनमें टà¥à¤°à¥‡à¤¡ यूनियन, कामगार संघ और सामाजिक संसà¥à¤¥à¤¾à¤“ं के सà¥à¤à¤¾à¤µ और राय शामिल किठगठहैं, पर अमल करके और ठोस कारà¥à¤°à¤µà¤¾à¤ˆ करके अनौपचारिक कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° के कामगारों की जरूरतों को पूरा किया जाठऔर उनकी सहायता की जाà¤à¥¤
पूरी रिपोरà¥à¤Ÿ पà¥à¤¨à¥‡ के लिठयहां कà¥à¤²à¤¿à¤• करें
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अधिक जानकारी के लिà¤Â संपरà¥à¤• करें:
जोसेफ मथाई (mathai.joseph@actionaid.org | +91 9810188022)
à¤à¤•à¥à¤¶à¤¨à¤à¤¡ à¤à¤¸à¥‹à¤¸à¤¿à¤à¤¶à¤¨ के बारे में
सामाजिक संसà¥à¤¥à¤¾ à¤à¤•à¥à¤¶à¤¨à¤à¤¡ à¤à¤¸à¥‹à¤¸à¤¿à¤à¤¶à¤¨ सामाजिक और पारिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤• नà¥à¤¯à¤¾à¤¯ के लिठकाम करने करती है। à¤à¤•à¥à¤¶à¤¨à¤à¤¡ 1972 के बाद से à¤à¤¾à¤°à¤¤ में समाज के पिछड़े और कमजोर समà¥à¤¦à¤¾à¤¯à¥‹à¤‚ के साथ जà¥à¥œà¤•र काम कर रही है। 2006 में à¤à¤•à¥à¤¶à¤¨à¤à¤¡ à¤à¤¸à¥‹à¤¸à¤¿à¤à¤¶à¤¨ को à¤à¤• à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ संगठन के रूप में पंजीकृत किया गया था, जो à¤à¤• सà¥à¤µà¤¤à¤‚तà¥à¤° महासà¤à¤¾ और à¤à¤• गवरà¥à¤¨à¤¿à¤‚ग बोरà¥à¤¡ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ शासित था। à¤à¤•à¥à¤¶à¤¨à¤à¤¡ अपने समरà¥à¤¥à¤•ों, समà¥à¤¦à¤¾à¤¯à¥‹à¤‚, संसà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ और सरकारों के साथ मिलकर काम करते हà¥à¤ सà¤à¥€ के लिठसमानता, बंधà¥à¤¤à¥à¤µ और सà¥à¤µà¤¤à¤‚तà¥à¤°à¤¤à¤¾ वाले समाज के निरà¥à¤®à¤¾à¤£ के लिठपà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸à¤°à¤¤ है। à¤à¤•à¥à¤¶à¤¨à¤à¤¡ à¤à¤¸à¥‹à¤¸à¤¿à¤à¤¶à¤¨ 24 राजà¥à¤¯à¥‹à¤‚ और दो केंदà¥à¤° शासित पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶à¥‹à¤‚ में काम करता है, जिसमें कई सहयोगी संसà¥à¤¥à¤¾à¤à¤‚ शामिल हैं।
à¤à¤•à¥à¤¶à¤¨à¤à¤¡ à¤à¤¸à¥‹à¤¸à¤¿à¤à¤¶à¤¨ à¤à¤• वैशà¥à¤µà¤¿à¤• महासंघ का हिसà¥à¤¸à¤¾ है और à¤à¤•à¥à¤¶à¤¨à¤à¤¡ इंटरनेशनल का पूरà¥à¤£ सहयोगी है, जिसकी विशà¥à¤µà¤à¤° में 40 से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ देशों में उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ है।
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