घà¥à¤®à¤‚तू और विमà¥à¤•à¥à¤¤ जनजातियों के नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¸à¤‚गत à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯ की कारà¥à¤¯à¤¸à¥‚ची
Update: Update: April 15, 2024
सनॠ1871 में, बà¥à¤°à¤¿à¤Ÿà¤¿à¤¶ औपनिवेशिक सरकार ने आपराधिक जनजाति अधिनियम पारित किया, जिसमें उतà¥à¤¤à¤°-पशà¥à¤šà¤¿à¤®à¥€ पà¥à¤°à¤¾à¤‚त, पंजाब और अवध के इलाक़े शामिल थे। à¤à¤• संशोधन के ज़रिठपहले 1876 में बंगाल पà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥€à¤¡à¥‡à¤‚सी; और, कà¥à¤› दशकों बाद 1924 में मदà¥à¤°à¤¾à¤¸ पà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥€à¤¡à¥‡à¤‚सी तक इस क़ानून की जद में आ चà¥à¤•े थे। इस कठोर कानून के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°à¤ƒ “यदि सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥€à¤¯ सरकार के पास इस बात पर यक़ीन करने की पà¥à¤–़à¥à¤¤à¤¾ वजह हो कि कोई जनजाति, गिरोह या वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का समूह वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¿à¤¤ तरीक़े से गैर-जमानती अपराधों में लीन पाया जाता है तो वह काउंसिल में गवरà¥à¤¨à¤° जनरल को मामले की रिपोरà¥à¤Ÿ, और à¤à¤¸à¥€ जनजाति, गिरोह या समूह को आपराधिक
जनजाति घोषित करने की सिफ़ारिश कर सकती है।†गवरà¥à¤¨à¤° जनरल दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥€à¤¯ सरकार की सिफ़ारिश को मान लेने पर इस सूचना को सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥€à¤¯ राजपतà¥à¤° में पà¥à¤°à¤•ाशित; तथा, जिला मजिसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤Ÿ को उस जिले में रहने वाली आपराधिक जनजाति के सदसà¥à¤¯à¥‹à¤‚ का à¤à¤• रजिसà¥à¤Ÿà¤° बनाना होता था। यदि आपराधिक जनजाति के पास कोई “निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ निवास सà¥à¤¥à¤¾à¤¨â€œ नहीं होता था तो कानून में यह à¤à¥€ पà¥à¤°à¤¾à¤µà¤§à¤¾à¤¨ था कि उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¤• निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर बसने के लिठमजबूर किया जाà¤à¥¤
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