घà¥à¤®à¤‚तू चरवाहों के नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¸à¤‚गत à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯ की कारà¥à¤¯à¤¸à¥‚ची
Update: Update: April 15, 2024
पृथà¥à¤µà¥€ पर घà¥à¤®à¤‚तू पषà¥à¤šà¤¾à¤°à¤£, पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨à¤¤à¤® वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¤¾à¤¯à¥‹à¤‚ में से à¤à¤• है। यह रखरखाव और साà¤à¤¾à¤•रण सहित, सहयोग और à¤à¤•जà¥à¤Ÿà¤¤à¤¾ में निहित सामाजिक वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ पर आधारित है तथा टिकाऊ तरीके से जीवन जीने की मिसाल पेष करता है। इसमें गतिषीलता, नà¥à¤¯à¥‚नतम परà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¤£à¥€à¤¯ पदचिहà¥à¤¨ और पà¥à¤°à¤•ृति के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ गहरे समà¥à¤®à¤¾à¤¨ का à¤à¤¾à¤µ शामिल है। इस वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¤¾à¤¯ की पà¥à¤°à¤¥à¤¾à¤à¤, à¤à¥‚मि पर कम से कम दबाव बनाकर जीने का मूलà¥à¤¯à¤µà¤¾à¤¨ सबक पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करती हैं, जो अनà¥à¤•ूलन, संसाधनषीलता और परà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¤£ से समरसता के महतà¥à¤µ पर जोर देती हैं। à¤à¤¾à¤°à¤¤ में घà¥à¤®à¤‚तू पषà¥à¤šà¤¾à¤°à¤£ की à¤à¤• समृदà¥à¤§ परंपरा रही है, जिसमें लाखों-लाख चरवाहे पषà¥à¤§à¤¨ आबादी का पà¥à¤°à¤¬à¤‚धन करते हैं। घà¥à¤®à¤‚तू चरवाहों के समà¥à¤¦à¤¾à¤¯, अरà¥à¤¥à¤µà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ और जैव-विविधता संरकà¥à¤·à¤¿à¤¤ करने में महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ योगदान देते हैं। आज बहà¥à¤¤ से घà¥à¤®à¤‚तू चरवाहे या तो पूरी तरह से à¤à¤• जगह पर बस चà¥à¤•े हैं, या, अरà¥à¤§-घà¥à¤®à¤‚तू जीवन वà¥à¤¯à¤¤à¥€à¤¤ करते हैं। इस परिवरà¥à¤¤à¤¿à¤¤ जीवन शैली के पीछे सामाजिक à¤à¤µà¤‚ परà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¤£à¥€à¤¯ कारण शामिल हैं। à¤à¤• अनà¥à¤®à¤¾à¤¨ के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤• à¤à¤¾à¤°à¤¤ की कà¥à¤² जनसंखà¥à¤¯à¤¾ का 1ः, या लगà¤à¤— 1.3 करोड़ लोग चरवाहे हैं। इनके लिठपषà¥à¤§à¤¨ पà¥à¤°à¤¬à¤‚धन और पà¥à¤°à¤œà¤¨à¤¨ सदियों से चला आ रहा à¤à¤• वंषानà¥à¤—त पेषा है।
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