नà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¸à¤‚गत à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯ के लिठà¤à¤•ल नारियों की कारà¥à¤¯à¤¸à¥‚ची
Update: Update: May 14, 2024
लगà¤à¤— दो शताबà¥à¤¦à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ से समाज सà¥à¤§à¤¾à¤°à¤•, à¤à¤¾à¤°à¤¤ में विधवाओं की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ को लेकर चिंतित रहते आठहैं। विधवाओं की दà¥à¤°à¥à¤¦à¤¶à¤¾ के संबंध में जागरूकता जगाने और सामाजिक सà¥à¤§à¤¾à¤°à¥‹à¤‚ पर जोर देने के महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ काम में राजा राम मोहन राय, ईशà¥à¤µà¤° चंदà¥à¤° विदà¥à¤¯à¤¾à¤¸à¤¾à¤—र और पंडिता रमाबाई जैसे समाज सà¥à¤§à¤¾à¤°à¤•ों के पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸à¥‹à¤‚ से अंगà¥à¤°à¥‡à¤œ सरकार को विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ नीतियों और कानूनों को लागू करने के लिठविवश होना पड़ा। इन नीतियों और कानूनों के कारण उनकी दà¥à¤°à¥à¤¦à¤¶à¤¾ में कमी आई। सती पà¥à¤°à¤¥à¤¾, जिसके चलते विधवाओं से अपने पति की चिता पर आतà¥à¤®à¤¦à¤¾à¤¹ करने की अपेकà¥à¤·à¤¾ की जाती थी, उसे सनॠ1829 में अंगà¥à¤°à¥‡à¤œ सरकार दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ आधिकारिक तौर पर समापà¥à¤¤ कर दिया गया। लेकिन, इससे जà¥à¤¡à¤¼à¤¾ सामाजिक दबाव और कलंक कायम रहा। इसके अतिरिकà¥à¤¤, उतà¥à¤¤à¤°à¤¾à¤§à¤¿à¤•ार कानूनों ने अकà¥à¤¸à¤° विधवाओं को हाशिठपर बनाठरखा और पà¥à¤°à¥à¤· रिशà¥à¤¤à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¥‹à¤‚ ने उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ शोषण के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ संवेदनशील बनाया।
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