Author: Dr Sharad Kumari
(Dr Sharad Kumari leads ActionAid Association’s work in Bihar and Jharkhand. The views expressed here are personal and do not necessarily reflect those of ActionAid Association.)
उतà¥à¤¤à¤° बिहार की à¤à¤• खतरनाक और बाढ़पà¥à¤°à¤µà¤£ नदी – महानंदा – के किनारे बसे गांव की यह कहानी है। यह वह इलाका है जहां हर साल à¤à¤¾à¤°à¥€ बाढ़ आती है, जिससे जनजीवन असà¥à¤¤-वà¥à¤¯à¤¸à¥à¤¤ हो जाता है और आरà¥à¤¥à¤¿à¤• गतिविधियां पूरी तरह से ठप पड़ जाती हैं। सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥€à¤¯ सà¥à¤¤à¤° पर रोजगार के कोई ठोस अवसर नहीं हैं। परिणामसà¥à¤µà¤°à¥‚प, यहां के लोगों को या तो पलायन करना पड़ता है या फिर साइकिल पर खादà¥à¤¯ सामगà¥à¤°à¥€ बेचने जैसे छोटे-मोटे कामों पर निरà¥à¤à¤° रहना पड़ता है। यहां तक कि लगà¤à¤— 80-90 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ लोग आजीविका के लिठगांव छोड़ चà¥à¤•े हैं।
इसी परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में à¤à¤• पिता ने अपने बेटे मोहन कà¥à¤®à¤¾à¤° (बदला हà¥à¤† नाम) को बाल मजदूरी करने à¤à¥‡à¤œà¤¨à¥‡ का निरà¥à¤£à¤¯ लिया। मोहन उस समय केवल 9वीं ककà¥à¤·à¤¾ का छातà¥à¤° था।
लेकिन इस बीच मोहन की बहन होलिका  (बदला हà¥à¤† नाम)अपने पिता को समà¤à¤¾à¤¨à¥‡/मनाने में सफल रही। उसके पिता मोहन को सà¥à¤•ूल à¤à¥‡à¤œà¤¨à¥‡ के लिठराजी हो गà¤à¥¤ परिणामसà¥à¤µà¤°à¥‚प, आज मोहन ने पà¥à¤°à¤¥à¤® शà¥à¤°à¥‡à¤£à¥€ से मैटà¥à¤°à¤¿à¤• पास किया है।, फिर इंटर करके तब अपने परिवार के लिठकाम करना शà¥à¤°à¥‚ किया है।
होलिका à¤à¤•à¥à¤¶à¤¨ à¤à¤¡ à¤à¤¸à¥‹à¤¸à¤¿à¤à¤¶à¤¨ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ संचालित किशोर किशोरियों के समूह बैठक में नियमित आती थी और किशोर किशोरियों के सशकà¥à¤¤à¤¿à¤•रण à¤à¤µà¤‚ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¤à¥à¤µ निरà¥à¤®à¤¾à¤£ के मà¥à¤¦à¥à¤¦à¥‹à¤‚ पर रोजाना बातचीत ‌, खेलकूद à¤à¤µà¤‚ अनà¥à¤¯ कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ कलापों में à¤à¤¾à¤— लेती थी. सामाजिक सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ योजनाओं पर जागरूकता, अशिकà¥à¤·à¤¾, बाल शà¥à¤°à¤®, बाल विवाह के दà¥à¤·à¥à¤ªà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥‹à¤‚ पर à¤à¤•à¥à¤¶à¤¨ à¤à¤¡ à¤à¤¸à¥‹à¤¸à¤¿à¤à¤¶à¤¨ के कारà¥à¤¯à¤•रà¥à¤¤à¤¾à¤“ं के निरंतर हसà¥à¤¤à¤•à¥à¤·à¥‡à¤ª के कारण होलिका ने अपने माता-पिता से बात करने का फैसला किया और वह‌ खà¥à¤¦ से तथा à¤à¤•à¥à¤¶à¤¨ à¤à¤¡ à¤à¤¸à¥‹à¤¸à¤¿à¤à¤¶à¤¨ के साथियों की मदद से अपने à¤à¤¾à¤ˆ मोहन को बाल मजदूरी करने से बचा पाई.
à¤à¤•à¥à¤¶à¤¨ à¤à¤¡ à¤à¤¸à¥‹à¤¸à¤¿à¤à¤¶à¤¨ के निरंतर हसà¥à¤¤à¤•à¥à¤·à¥‡à¤ª के कारण और मोहन कà¥à¤®à¤¾à¤° की सफलता को देखते हà¥à¤,उस कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° के 30 लड़कियां और 19 लड़के जो या तो सà¥à¤•ूल छोड़ चà¥à¤•े थे या कà¤à¥€ सà¥à¤•ूल नहीं जाते थे, उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने à¤à¥€ सà¥à¤•ूल जाना शà¥à¤°à¥‚ कर दिया और आज à¤à¥€ जारी हैं।
 तब से लेकर अब तक होलिका के टोले और समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ में बाल विवाह और बाल शà¥à¤°à¤® के कोई मामले सामने नहीं आà¤à¥¤ समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ सà¤à¥€ सामाजिक सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ योजनाओं और इसकी पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के बारे में लगà¤à¤— जागरूक है। समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ ने बाढ़ के खिलाफ़ निपटने के लिठतंतà¥à¤° विकसित कर लिया है। खास तौर पर, किशोर लड़कियां और महिलाà¤à¤‚ बाढ़ के समय अपने रजोनिवृतà¥à¤¤à¤¿ का पà¥à¤°à¤¬à¤‚धन करने में सकà¥à¤·à¤® हैं।
अंत में, होलिका ने खà¥à¤¦ अपना बाल विवाह à¤à¥€ रोका ,समय पà¥à¤°à¤¾ होने पर शादी की तथा à¤à¤•à¥à¤¶à¤¨ à¤à¤¡ à¤à¤¸à¥‹à¤¸à¤¿à¤à¤¶à¤¨ के साथ à¤à¤• वोलेंटियर के रूप में काम करती रही, समय आने पर उसे à¤à¤• साथी संसà¥à¤¥à¤¾ में पंचायत समनà¥à¤µà¤¯à¤• के रूप में सीपीà¤à¤¸à¤à¤² (सà¥à¤¥à¤¾à¤¯à¥€ आजीविका को बढ़ावा देने के लिठकेंदà¥à¤°) में नौकरी मिल गई है और वह अपने गांव और आसपास के कई लोगों के लिठरोल मॉडल बन गई है।


होलिका  बिहार के पूरà¥à¤£à¤¿à¤¯à¤¾ जिले के बैसी पà¥à¤°à¤–ंड, पंचायत- गंगर घोष, अमीरगंज गांव की रहने वाली है। उसके परिवार में तीन à¤à¤¾à¤ˆ और दो बहनें हैं। पिता à¤à¤• छोटे दà¥à¤•ानदार हैं, जो मà¥à¤¶à¥à¤•िल से 5000 रà¥à¤ªà¤¯à¥‡ महीना कमा पाते हैं। मां गृहिणी हैं। पिता और मां दोनों ही अनपढ़ हैं। होलिका कला सà¥à¤¨à¤¾à¤¤à¤• की पढ़ाई कर रही है, उसके à¤à¤¾à¤ˆ मोहन कà¥à¤®à¤¾à¤° ने इंटर किया है और बाकी à¤à¤¾à¤ˆ-बहन आंगनवाड़ी या पास के सरकारी सà¥à¤•ूल में शिकà¥à¤·à¤¾ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ कर रहे हैं। शिकà¥à¤·à¤¾ की यही सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ पूरे कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° और गांव की आबादी में है।
पिछले 7-8 वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ से à¤à¤•à¥à¤¶à¤¨ à¤à¤¡ à¤à¤¸à¥‹à¤¸à¤¿à¤à¤¶à¤¨ बिहार के 15 जिलों में बाल संरकà¥à¤·à¤£ और किशोर-किशोरियों के सशकà¥à¤¤à¤¿à¤•रण के लिठनिरंतर काम कर रहा है। इसकी टीम ने जमीनी सà¥à¤¤à¤° पर गहन पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾à¤à¤‚ अपनाई हैं – जैसे कि समà¥à¤¦à¤¾à¤¯ में बाल विवाह, बाल शà¥à¤°à¤®, अशिकà¥à¤·à¤¾, लैंगिक à¤à¥‡à¤¦à¤à¤¾à¤µ, नशा, और सामाजिक सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ योजनाओं पर जागरूकता फैलाना। किशोर-किशोरियों को जीवन कौशल, करियर फेयर, नेतृतà¥à¤µ कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ और सकारातà¥à¤®à¤• मरà¥à¤¦à¤¾à¤¨à¤—ी जैसे मà¥à¤¦à¥à¤¦à¥‹à¤‚ पर पà¥à¤°à¤¶à¤¿à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ किया गया है।
किशोरों और किशोरियों ने मिलकर न केवल अपनी समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ पहचानीं, बलà¥à¤•ि उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ हल करने के रासà¥à¤¤à¥‡ à¤à¥€ खोजे। किशोरियों ने माहवारी पà¥à¤°à¤¬à¤‚धन पर खà¥à¤²à¤•र बात की, तो किशोरों ने नशा मà¥à¤•à¥à¤¤ जीवन और बाल विवाह/बाल शà¥à¤°à¤® से मà¥à¤•à¥à¤¤à¤¿ का संदेश दिया। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अपने अà¤à¤¿à¤à¤¾à¤µà¤•ों, जनपà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¨à¤¿à¤§à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚, शिकà¥à¤·à¤•ों और सरकारी अधिकारियों तक अपनी बात दृढ़ता से पहà¥à¤‚चाई।
यह कहानी सिरà¥à¤« à¤à¤• होलिका की नहीं, बलà¥à¤•ि उस बदलाव की है जो तब आता है जब समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े लोग à¤à¥€ जागरूक और सशकà¥à¤¤ हो जाà¤à¤‚। à¤à¤•à¥à¤¶à¤¨ à¤à¤¡ à¤à¤¸à¥‹à¤¸à¤¿à¤à¤¶à¤¨ जैसे संगठनों के सहयोग से किशोरियों का यह नेतृतà¥à¤µ सामाजिक कà¥à¤°à¤¾à¤‚ति की नींव बन गया है। यह कहानी पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾ देती है कि परिसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ चाहे जैसी à¤à¥€ हों, जब जागरूकता, शिकà¥à¤·à¤¾ और साहस मिल जाà¤à¤‚, तो बदलाव अवशà¥à¤¯ आता है।
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