समाज सेवा के कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में आने वाले यà¥à¤µà¤¾à¤“ं के लिठआज बाजारवाद सबसे बड़ी चà¥à¤¨à¥Œà¤¤à¥€ है। अपनी जरूरतों को पूरा करने की होड़ में लगी पीढ़ी पर परिवार और समाज का à¤à¥€ अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• दबाव है । à¤à¤¸à¥‡ में जो यà¥à¤µà¤¾ संवेदनशील होते हैं और धरातल से जà¥à¤¡à¤¼à¤•र काम करना चाहते हैं, वे à¤à¥€ कहीं न कहीं आरà¥à¤¥à¤¿à¤• और सामाजिक बाधाओं के कारण आगे नहीं बढ़ पाते हैं ।” समाजसेवी और à¤à¤•à¥à¤¶à¤¨ à¤à¤¡ की पà¥à¤°à¥‹à¤—à¥à¤°à¤¾à¤® मैनेजर शरद कà¥à¤®à¤¾à¤°à¥€ जब ये बातें कहती हैं तो उनके चेहरे पर चिंता की लकीरें फैल जाती हैं। वे साफ तौर पर कहती हैं कि आज की पीढ़ी पिछली पीढ़ियों की तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में कहीं अधिक तेज हैं और चौबीसों घंटे सूचनाओं से घिरी हैं। उनके पास सीखने के तेज और आकरà¥à¤·à¤• साधन हैं। à¤à¤¸à¥‡ में उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ सही और गलत का फरà¥à¤• समà¤à¤¾à¤¨à¤¾ बड़ी चà¥à¤¨à¥Œà¤¤à¥€ है, और उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ सही मारà¥à¤—दरà¥à¤¶à¤¨ देने की जिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¥€ सरकार, समाज और परिवार की है। हमने अपने संघरà¥à¤·à¥‹ से जो कà¥à¤› पाया है, उसे सहेजने और आगे बढ़ाने का दायितà¥à¤µ आज की यà¥à¤µà¤¾ पीढ़ी के कंधों पर है लेकिन उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ सही राह दिखाने की महती जिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¥€ हम सबको मिलकर निà¤à¤¾à¤¨à¥€ होगी ।
यà¥à¤µà¤¾ महिलाओं पर सांसà¥à¤•ृतिक दबाव
शरद जी कहती हैं कि समाज सेवा के कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में काम करते हà¥à¤ उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने देखा है कि लड़कियां बाहर निकलना चाहती हैं, दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ देखना चाहती हैं लेकिन परिवार उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ इसकी इजाजत नहीं देता है। शादी के पहले परिवार उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अकेली लड़की होने का à¤à¤¯ दिखाता है तो शादी के बाद मायके और ससà¥à¤°à¤¾à¤² की इजà¥à¤œà¤¤ बनाठरखने का बोठथोप कर उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ घर में कैद कर देता है। दà¥à¤–द तो यह है कि आज धरà¥à¤® और संसà¥à¤•ृति के नाम पर पढ़ी-लिखी लड़कियों को à¤à¥€ बहलाया जा रहा है। शादी के पहले अचà¥à¤›à¥€-खासी नौकरी कर रही बहà¥à¤¤ सारी लड़कियां शादी के बाद अपनी नौकरी सà¥à¤µà¥‡à¤šà¥à¤›à¤¾ से छोड़कर पति को परमेशà¥à¤µà¤° मानने की सोच को सही ठहराने लगी हैं और घरेलू हिंसा को नठरूप में सà¥à¤µà¥€à¤•ार करने लगी हैं। बाजार में औरतों को केवल देह की कीमत समà¤à¤¾à¤ˆ जा रही है, दिमाग की नहीं, और यह सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ घातक हो सकती है।
समाज सेवा में यà¥à¤µà¤¾à¤“ं की à¤à¥‚मिका
पहले की तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में आज बहà¥à¤¤ अंतर आया है, खासकर समाज सेवा के कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में हम देखते हैं कि जो बचà¥à¤šà¥‡ डिजिटल दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ को सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ तरीके से सीख पा रहे हैं, वे सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ परिवरà¥à¤¤à¤¨ के वाहक बन रहे हैं। उनकी मदद से समà¥à¤¦à¤¾à¤¯à¥‹à¤‚ में बदलाव को तेजी से लाया जा सकता है। बाल विवाह, बाल मजदूरी के अà¤à¤¿à¤¶à¤¾à¤ª को बताने और शिकà¥à¤·à¤¾ के महतà¥à¤µ को दिखाने के लिठआज इंटरनेट पर अचà¥à¤›à¥€ सामगà¥à¤°à¥€ उपलबà¥à¤§ है, जिसका फायदा बचà¥à¤šà¥‡ à¤à¥€ उठा रहे हैं और अपने माता-पिता व समाज को जागरूक कर रहे हैं। हालांकि बहà¥à¤¤ सारे लड़के-लड़कियां समाज सेवा के कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में इसलिठआते हैं कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने इसकी पढ़ाई की हà¥à¤ˆ होती है। वे à¤à¤• पेशेवर की तरह इस कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में आते हैं। आज मेरे साथ कई कारà¥à¤¯à¤•रà¥à¤¤à¤¾ हैं जो बाल विवाह पर काम कर रहे हैं लेकिन उनमें से कई लोग इस समसà¥à¤¯à¤¾ को जड़ से नहीं समठपाते हैं । कई बार वे à¤à¥€ आम लोगों की à¤à¤¾à¤·à¤¾ में ही बात करने लगते हैं । फिर à¤à¥€ उनके बीच में ही कà¥à¤› à¤à¤¸à¥‡ यà¥à¤µà¤¾ निकलते हैं जो इन समसà¥à¤¯à¤¾à¤“ं के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ संवेदनशील होते हैं और वे à¤à¤µà¤¿à¤·à¥à¤¯ के सामाजिक कारà¥à¤¯à¤•रà¥à¤¤à¤¾ के तौर पर सामने आते हैं à¤à¤¸à¥‡ यà¥à¤µà¤¾ दिल से सोचते हैं और लोगों से जà¥à¤¡à¤¼ पाते हैं |
à¤à¤•à¥à¤¶à¤¨à¤à¤¡ à¤à¤¸à¥‹à¤¸à¤¿à¤à¤¶à¤¨ के पà¥à¤°à¥‹à¤—à¥à¤°à¤¾à¤® मैनेजर शरद कà¥à¤®à¤¾à¤°à¥€ का “
मंजरी” में पà¥à¤°à¤•ाशित à¤à¤• साकà¥à¤·à¤¾à¤¤à¥à¤•ार