”अनलॉक की प्रक्रिया के बाद रोजगार बढ़े, फिर भी अनौपचारिक क्षेत्र के कामगारों के लिए निम्न वेतन और कम उपभोग की समस्या बरकरार“ – अनौपचारिक क्षेत्र के कामगारों के देशव्यापी सर्वे की द्वितीय चरण की रिपोर्ट | ActionAid India
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”अनलॉक की प्रक्रिया के बाद रोजगार बढ़े, फिर भी अनौपचारिक क्षेत्र के कामगारों के लिए निम्न वेतन और कम उपभोग की समस्या बरकरार“ – अनौपचारिक क्षेत्र के कामगारों के देशव्यापी सर्वे की द्वितीय चरण की रिपोर्ट

Date : 7-November-2020

देश में अनलॉक की प्रक्रिया शुरू होने के बाद भी लगभग 48 प्रतिशत श्रमिकों का कहना है कि वे बेरोजगार हैं। एक्शनएड एसोसिएशन द्वारा किए जा रहे अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों पर एक देशव्यापी अध्ययन के दूसरे चरण के परिणाम लॉकडाउन अवधि के दौरान किए गए सर्वेक्षण के पहले चरण की परिणाम की तुलना में सुधार को दर्शाते हैं, जब कुल किए गए साक्षात्कार में से 78 प्रतिशत कामगारों ने लॉकडाउन में आजीविका खत्म होने की बात कही थी। हालांकि, वे श्रमिक, जो अनलॉक की प्रक्रिया के बाद रोजगार पाने में सफल रहे हैं, उनमें से 42 प्रतिशत के करीब ने कहा कि वे या तो आंशिक रूप से काम कर पा रहे हैं, कभी-कभार या कम घंटे काम कर रहे हैं। ऐसा अनलॉक प्रक्रिया में काम की गहनता के कारण भी हो सकता है, जो कि पहले से बढ़ी है, लेकिन लॉकडाउन से पहले की स्थिति जिसे हम सामान्य स्थिति मान सकते हैं, से कॉफी कम है।

अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों के देशव्यापी अध्ययन के लिए दूसरे चरण के सर्वेक्षण में देश भर के 23 राज्यों के 400 से अधिक जिलों में 16,900 से अधिक अनौपचारिक कामगारों से बातचीत की गई। यह सर्वेक्षण 23 अगस्त 2020 से 8 सितंबर 2020 तक अनलॉक प्रक्रिया 3.0 के दौरान किया गया, जो सरकार की चरणवार अनलॉक प्रक्रिया के माध्यम से लॉकडाउन खत्म करने की योजना का तीसरा चरण था। साक्षात्कार में शामिल कामगारों से विभिन्न मुद्दों पर बातचीत करने के दौरान उनकी आजीविका, वेतन, बचत, खपत, व्यय और कल्याणकारी योजनाओं तक उनकी पहुंच के बारे में के बारे में पूछा गया। कामगारों का लगभग एक तिहाई शहरी क्षेत्रों से जबकि 72 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों से था। वहीं, 63 प्रतिशत पुरुष कामगार, 37 प्रतिशत महिला कामगार और 17 ट्रांसजेंडर कामगारों ने सर्वे में हिस्सा लिया। अध्ययन का उद्देश्य इस बात इस बात को गहराई से समझना है कि मौजूदा देशव्यापी संकट अनौपचारिक क्षेत्र में श्रमिकों के जीवन पर किस तरह से प्रभाव डाल रहा है।

चूंकि रोजगार की स्थिति अब भी पूर्व-लॉकडाउन के स्तर से कहीं पीछे है, इस कारण कामगारों को मिलने वाला मासिक वेतन बहुत कम है। लगभग 24 प्रतिशत कामगारों ने अनलॉक की प्रक्रिया में न के बराबर वेतन पाने की बात कही और 50 प्रतिशत के लगभग कामगारों ने मासिक वेतन 5,000 रुपए से भी कम होने की बात कही। इसके अतिरिक्त, 64 प्रतिशत से अधिक कामगारों ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान उनका बकाया वेतन अब तक उन्हें नहीं मिला है।

रोजगार और वेतन के निम्न स्तर को देखते हुए, उपभोग और बचत का तनाव अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों के जीवन पर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। कुल मिलाकर, 68 प्रतिशत कामगारों ने कहा कि उनके परिवार के लिए भोजन पर्याप्त नहीं था। 88 प्रतिशत के करीब श्रमिकों ने कहा कि उनकी बचत उनके लिए पर्याप्त नहीं थी। इसमें शहरी से 93 प्रतिशत कामगार और ग्रामीण क्षेत्रों के 86 प्रतिशत कामगार शामिल हैं। इसके अलावा, लगभग 39 प्रतिशत श्रमिकों ने बताया कि उन्हें अनलॉक की प्रक्रिया के दौरान परिवार का खर्च चलाने के लिए उधार लेना पड़ा है। इसमें शहरी क्षेत्रों के 47 प्रतिशत श्रमिक और ग्रामीण क्षेत्रों के 36 प्रतिशत श्रमिक शामिल हैं। लॉकडाउन से पहले काम के लिए दूसरी जगहों या गांव से शहरों को पलायन करने वाले श्रमिकों का कहना है कि वे अब काम के लिए बाहर नहीं जाना चाहते हैं। लगभग 57 प्रतिशत ऐसे श्रमिकों ने कहा कि वे अपने गृह जिलों में रहकर ही काम तलाश करेंगे। इसके पीछे प्रवास शहर या जिले में कोविड -19 के संक्रमण का खतरा, रोजगार के अवसरों की कमी, और शहरों में स्थिति सामान्य होने में लगने वाले समय की अनिश्चतता प्रमुख वजहें हैं।

सर्वेक्षण के ये शुरुआती परिणाम अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों के जीवन को वापस पटरी पर लाने के प्रयास, उन्हें कर्ज में डूबने से बचाने के प्रयास और उनके लिए आजीविका के पुनर्निर्माण की तत्काल आवश्यकता को उजागर करते हैं। सर्वे के परिणामों और निष्कर्षों को एक विस्तृत रिपोर्ट के साथ-साथ आने वाले कुछ सप्ताह में राज्य स्तर के आंकड़ों के साथ नीतियों और जमीनी हस्तक्षेपों के लिए आधार को मजबूती देने के लिए सामने लाया जाएगा।

एक्शनएड एसोसिएशन के कार्यकारी निदेशक संदीप चचरा ने अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों पर किए गए देशव्यापी अध्ययन के दूसरे चरण के परिणाम और निष्कर्ण को जारी करते हुए कहा, “एक्शनएड एसोसिएशन ने देश भर में अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों की स्थिति को गहराई से समझने के लिए यह देशव्यापी सर्वेक्षण किया है, ताकि कोविड -19 की स्थिति और संकट का सामना करने में उनकी मदद की जा सके। इस समय देश भर में अनौपचारिक अर्थव्यवस्था पर निर्भर सभी लोगों को मदद और सहयोग प्रदान करने की आवश्यकता है, जिसके तहत एमएसएमई क्षेत्र के लिए लिंक समर्थन, श्रमिकों की रोजगार सुरक्षा के लिए पेरोल समर्थन और साथ ही गरीब कल्याण रोजगार अभियान का विस्तार करना ताकि ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में आजीविका के अवसरों को बेहतर बनाने जा सके।

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एक्शनएड एसोसिएशन के बारे में

सामाजिक संस्था एक्शनएड एसोसिएशन सामाजिक और पारिस्थितिक न्याय के लिए काम करने करती है। एक्शनएड 1972 के बाद से भारत में समाज के पिछड़े और कमजोर समुदायों के साथ जुड़कर काम कर रही है। 2006 में एक्शनएड एसोसिएशन को एक भारतीय संगठन के रूप में पंजीकृत किया गया था, जो एक स्वतंत्र महासभा और एक गवर्निंग बोर्ड द्वारा शासित था। एक्शनएड अपने समर्थकों, समुदायों, संस्थानों और सरकारों के साथ मिलकर काम करते हुए सभी के लिए समानता, बंधुत्व और स्वतंत्रता वाले समाज के निर्माण के लिए प्रयासरत है। एक्शनएड एसोसिएशन 24 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में काम करता है, जिसमें कई सहयोगी संस्थाएं शामिल हैं।

एक्शनएड एसोसिएशन एक वैश्विक महासंघ का हिस्सा है और एक्शनएड इंटरनेशनल का पूर्ण सहयोगी है, जिसकी विश्वभर में 40 से ज्यादा देशों में उपस्थिति है।