“रोजगार में बढ़त, लेकिन अब भी निम्न वेतन और कम उपभोग से जूझ रहे अनौपचारिक क्षेत्र के कामगार” – अनौपचारिक क्षेत्र के कामगारों की स्थिति पर किए गए देशव्यापी सर्वे की द्वितीय चरण की रिपोर्ट | ActionAid India
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“रोजगार में बढ़त, लेकिन अब भी निम्न वेतन और कम उपभोग से जूझ रहे अनौपचारिक क्षेत्र के कामगार” – अनौपचारिक क्षेत्र के कामगारों की स्थिति पर किए गए देशव्यापी सर्वे की द्वितीय चरण की रिपोर्ट

Date : 10-Feb-2021

दिल्ली, 10 फरवरी | तमिलनाडू के तिरुपुर की रहने वाली यशोधा एक खेतिहर मजदूर है। जब वह छोटी थी, तब एक निजी नारियल बागान में एक बंधुआ मजदूर थी। शादी के कुछ समय बाद ही वह विधवा हो गई और काम करने के बदले बेहद कम पैसे मिलने के कारण उसे अपने जीवनयापन के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ा। यही नहीं, पुराने कर्ज चुकाने के लिए वह स्वयं सहायता समूह, माइक्रो फाइनांस इंस्टीट्यूट और जमींदारों से पैसे लेती रही और इस समय उस पर लगभग एक लाख रुपए का कर्ज है। लाॅकडाउन के दौरान करीब डेढ़ महीने से भी ज्यादा समय तक उसके पास न आजीविका थी और न ही आय का कोई और साधन। लाॅकडाउन खत्म होने के बाद भी उसकी बढ़ती उम्र के कारण उसे आसानी से काम नहीं मिलता। वहीं, महिला होना और पिछड़े समुदाय से होना उसकी दिक्कतों और मुश्किलों को और बढ़ा देता है। दो वक्त के खाने के लिए उसे कई दिनों तक पीडीएस और पड़ोसियों की दया पर निर्भर रहना पड़ा, जब आय का एक मात्र जरिया अनियमित मनरेगा रोजगार और दो महीनों के लिए राज्य सरकार की तरफ से मिली वित्तीय सहायता थी।

यशोदा (बदला हुआ नाम) इन मुश्किलों का सामना करने वाली अकेली महिला नहीं है। एक्शनएड एसोशिएशन इंडिया द्वारा अनौपचारिक क्षेत्र के कामगारों की स्थिति पर किए गए राष्ट्रीय व्यापी अध्ययन के दूसरे चरण की रिर्पोट के अनुसार सर्वे के कुल प्रतिभागियों में से  करीब 48 प्रतिशत का कहना था कि लाॅकडाउन खत्म होने के बााद भी वे बेरोजगार हैं। हांलांकि अध्ययन के पहले चरण, जो कि लाॅकडाउन के दौरान किया गया था, की तुलना में इस बार स्थिति थोड़ी बेहतर हुई है। पहले चरण में सर्वे में भाग लेने वाले कुछ प्रतिभागियों में से करीब 78 प्रतिशत ने कहा था कि उनका रोजगार छिन चुका है और वे बेरोजगार हैं। हालांकि 42 प्रतिशत के करीब कामगार, जिन्होंने लाॅकडाउन खत्म होने के बाद वापस काम पर जाना शुरू किया है, उनका कहना है कि काम कभी मिलता है कभी नहीं मिलता और काम समय के लिए काम मिलता है। ऐसा अनलॉक प्रक्रिया में काम की गहनता के कारण भी हो सकता है, जो कि पहले से बढ़ी है, लेकिन लाॅकडाउन से पहले की स्थिति जिसे हम सामान्य स्थिति मान सकते हैं, से काॅफी कम है।

अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों के देशव्यापी अध्ययन के लिए दूसरे चरण के सर्वेक्षण में देश भर के 23 राज्यों के 400 से अधिक जिलों में 16,900 से अधिक अनौपचारिक कामगारों से बातचीत की गई। यह सर्वेक्षण 23 अगस्त 2020 से 8 सितंबर 2020 तक अनलॉक प्रक्रिया 3.0 के दौरान किया गया, जो सरकार की चरणवार अनलाॅक प्रक्रिया के माध्यम से लाॅकडाउन खत्म करने की योजना का तीसरा चरण था।

साक्षात्कार में शामिल कामगारों से विभिन्न मुद्दों पर बातचीत करने के दौरान उनकी आजीविका, वेतन, बचत, खपत, व्यय और कल्याणकारी योजनाओं तक उनकी पहुंच के बारे में के बारे में पूछा गया। कामगारों का लगभग एक तिहाई शहरी क्षेत्रों से जबकि 72 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों से था। वहीं, 63 प्रतिशत पुरुष कामगार, 37 प्रतिशत महिला कामगार और 17 ट्रांसजेंडर कामगारों ने सर्वे में हिस्सा लिया। अध्ययन का उद्देश्य इस बात इस बात को गहराई से समझना है कि मौजूदा देशव्यापी संकट अनौपचारिक क्षेत्र में श्रमिकों के जीवन पर किस तरह से प्रभाव डाल रहा है।

चूंकि रोजगार की स्थिति अब भी पूर्व-लॉकडाउन के स्तर से कहीं पीछे हैै, इस कारण कामगारों को मिलने वाला मासिक वेतन बहुत कम है। लगभग 24 प्रतिशत कामगारों ने अनलॉक की प्रक्रिया में न के बराबर वेतन पाने की बात कही और 50 प्रतिशत के लगभग कामगारों ने मासिक वेतन 5,000 रुपए से भी कम होने की बात कही। इसके अतिरिक्त, 64 प्रतिशत से अधिक कामगारों ने कहा कि लाॅकडाउन के दौरान उनका बकाया वेतन अब तक उन्हें नहीं मिला है।

रोजगार और वेतन के निम्न स्तर को देखते हुए, उपभोग और बचत का तनाव अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों के जीवन पर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। कुल मिलाकर, 68 प्रतिशत कामगारों ने कहा कि उनके परिवार के लिए भोजन पर्याप्त नहीं था। 88 प्रतिशत के करीब श्रमिकों ने कहा कि उनकी बचत उनके लिए पर्याप्त नहीं थी। इसमें शहरी से 93 प्रतिशत कामगार और ग्रामीण क्षेत्रों के 86 प्रतिशत कामगार शामिल हैं। इसके अलावा, लगभग 39 प्रतिशत श्रमिकों ने बताया कि उन्हें अनलॉक की प्रक्रिया के दौरान परिवार का खर्च चलाने के लिए उधार लेना पड़ा है। इसमें शहरी क्षेत्रों के 47 प्रतिशत श्रमिक और ग्रामीण क्षेत्रों के 36 प्रतिशत श्रमिक शामिल हैं। लॉकडाउन से पहले काम के लिए दूसरी जगहों या गांव से शहरों को पलायन करने वाले श्रमिकों का कहना है कि वे अब काम के लिए बाहर नहीं जाना चाहते हैं। लगभग 57 प्रतिशत ऐसे श्रमिकों ने कहा कि वे अपने गृह जिलों में रहकर ही काम तलाश करेंगे। इसके पीछे प्रवास शहर या जिले में कोविड -19 के संक्रमण का खतरा, रोजगार के अवसरों की कमी, और शहरों में स्थिति सामान्य होने में लगने वाले समय की अनिश्चतता प्रमुख वजहें हैं।

सर्वेक्षण के ये शुरुआती परिणाम अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों के जीवन को वापस पटरी पर लाने के प्रयास, उन्हें कर्ज में डूबने से बचाने के प्रयास और उनके लिए आजीविका के पुनर्निर्माण की तत्काल आवश्यकता को उजागर करते हैं। सर्वे के परिणामों और निष्कर्षों को एक विस्तृत रिपोर्ट के साथ-साथ आने वाले कुछ सप्ताह में राज्य स्तर के आंकड़ों के साथ नीतियों और जमीनी हस्तक्षेपों के लिए आधार को मजबूती देने के लिए सामने लाया जाएगा।

एक्शनएड एसोसिएशन के कार्यकारी निदेशक संदीप चाचरा ने अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों पर किए गए देशव्यापी अध्ययन के दूसरे चरण की रिपोर्ट जारी करते हुए कहा, “एक्शनएड एसोसिएशन ने देश भर में अनौपचारिक क्षेत्र के श्रमिकों की स्थिति को गहराई से समझने के लिए यह देशव्यापी सर्वेक्षण किया है, ताकि कोविड -19 की स्थिति और संकट का सामना करने में उनकी मुश्किलों और जरूरतों को समझते हुए उनकी मदद के लिए सही कदम उठाए जा सकें। हम आशा करते हैं कि इस रिपोर्ट में शामिल सुझाव, जिनमें ट्रेड यूनियन, कामगार संघ और सामाजिक संस्थाओं के सुझाव और राय शामिल किए गए हैं, पर अमल करके और ठोस कार्रवाई करके अनौपचारिक क्षेत्र के कामगारों की जरूरतों को पूरा किया जाए और उनकी सहायता की जाए।

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जोसेफ मथाई (mathai.joseph@actionaid.org | +91 9810188022)

एक्शनएड एसोसिएशन के बारे में

सामाजिक संस्था एक्शनएड एसोसिएशन सामाजिक और पारिस्थितिक न्याय के लिए काम करने करती है। एक्शनएड 1972 के बाद से भारत में समाज के पिछड़े और कमजोर समुदायों के साथ जुड़कर काम कर रही है। 2006 में एक्शनएड एसोसिएशन को एक भारतीय संगठन के रूप में पंजीकृत किया गया था, जो एक स्वतंत्र महासभा और एक गवर्निंग बोर्ड द्वारा शासित था। एक्शनएड अपने समर्थकों, समुदायों, संस्थानों और सरकारों के साथ मिलकर काम करते हुए सभी के लिए समानता, बंधुत्व और स्वतंत्रता वाले समाज के निर्माण के लिए प्रयासरत है। एक्शनएड एसोसिएशन 24 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में काम करता है, जिसमें कई सहयोगी संस्थाएं शामिल हैं।

एक्शनएड एसोसिएशन एक वैश्विक महासंघ का हिस्सा है और एक्शनएड इंटरनेशनल का पूर्ण सहयोगी है, जिसकी विश्वभर में 40 से ज्यादा देशों में उपस्थिति है।