बिन पानी सब सून (Without Water All Is Desolate)
सà¥à¤–ा या अकाल इस समय के सबसे खतरनाक, डरावने और चिंता पैदा करने वाले शबà¥à¤¦ है१ इन शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ का अरà¥à¤¥ यानि मौत, आतà¥à¤®à¤¹à¤¤à¥à¤¯à¤¾, पलायन, बंजर धरती, बूंद-बूंद पानी को तरसता समाज, अकाल मौत, मरते पशà¥-पकà¥à¤·à¥€, घटता जल सà¥à¤¤à¤° आदि१ आज सरकार के दबाव में à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ मौसम विà¤à¤¾à¤— सूखे शबà¥à¤¦ को ही टा-टा करना चाहता है और इसकी जगह कम वरà¥à¤·à¤¾, औसत वरà¥à¤·à¤¾ की शबà¥à¤¦à¤¾à¤µà¤²à¥€ उपयौग करना चाहता है और ये सिरà¥à¤« शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ का परिवरà¥à¤¤à¤¨ नहीं बलà¥à¤•ि à¤à¤• सोची समà¤à¥€ राजनीति है१ à¤à¤• बहस राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯-अंतरà¥à¤°à¤¾à¤·à¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ सà¥à¤¤à¤° पर मौसम परिवरà¥à¤¤à¤¨ की à¤à¥€ इस समय चल रही है,
सूखे का बà¥à¤‚देलखंड के जीवन पर गहरा असर दिखाई देता है१ खेत सूखे पड़े है, गावो में पीने का पानी नहीं है और रोजगार की तलाश में लोगो को दर-दर à¤à¤Ÿà¤•ना पड़ रहा है१ इस तरह बà¥à¤‚देलखंड के लोगो के जीवन जीने के अधिकार का हनन हो रहा है१ आखिर यह सवाल सà¤à¥€ के मन में है कि बà¥à¤‚देलखंड को सूखे से मà¥à¤•à¥à¤¤à¤¿ मिलेगी या नहीं, और यदि मिलेगी तो कब व केसे? इसी सवाल का उतà¥à¤¤à¤° तलाशने के लिठयह जरà¥à¤°à¥€ है कि बà¥à¤‚देलखंड में सूखे सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ को परखा जाये और उसे सामने लाकर समाज के बिà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ तबको, सरकार, पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨, सामाजिक कारà¥à¤¯à¤•रà¥à¤¤à¤¾à¤“, विशेषजà¥à¤žà¥‹ और संसà¥à¤¥à¤¾ संगठनो के साथ मिलकर उपाय के रासà¥à¤¤à¥‡ तलाशे जये१ इसी जरà¥à¤°à¤¤ को देखते हà¥à¤ पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ की अवधारणा सामने आई१
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